अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में देशों की भागीदारी का शतकीय आंकड़ा पार 101 देश कर रहे सहभाग

परमार्थ गंगा तट पर 101 देशों से आये योगियों ने माँ गंगा की रक्षा के लिए की ऐतिहासिक घोषणा गंगा, यमुना, अमेजॉन एवं यांग्जी नदियों के रक्षा का किया महासंकल्प

इंद्रधनुष की तरह योग का नजारा कहीं पर योगी बहा  रहे पसीना तो कहीं कर रहे योग निद्रा के माध्यम से आराम कोई कर रहा ध्यान, प्राणायाम, सत्संग व कीर्तन  तो कोई उठा रहा भारतीय भोजन का लुत्फ़

गंगा के तट पर योग सम्पन्न होना शाश्वत शांति, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया – स्वामी चिदानंद सरस्वती

ऋषिकेश, 4 मार्च – परमार्थ निकेतन ऋषिकेश, आयुष मंत्रालय – भारत सर्कार, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड, एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 29 वें वार्षिक विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के चौथे दिन की कक्षाओं प्रातः ४ बजे से सांय 9:30 बजे तक संचालित हुई । इस बार अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में पिछले सारे रिकार्डो को दरकिनार करते हुए 101 देशों से आये योग जिज्ञासु कर रहे है सहभाग ।  इस महोत्सव में 70 से अधिक पूज्य संतो, योगाचार्यो एवं योग विशेषज्ञों द्वारा योग विद्या के 150 विभिन्न आयामों का अभ्यास कराया जा रहा है । आज के दिन की शुरुआत कैलिफोर्निया, अमेरिका से आये गुरूशब्द सिंह खालसा के द्वारा कुंडलिनी योग के अभ्यास के साथ हुई ।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के  सह-संस्थापक पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ‘गंगा की तरह ही योग की अनवरत धारा प्रवाहित करना योग महोत्सव का उद्देश्य है । जो सफलता की ओर बढ़ रहा है । गंगा और योग दोनों की ओर दुनिया के लोग आकर्षित हो रहे है अतः गंगा के तट पर योग सम्पन्न होना शाश्वत शांति, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया है ।’

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ‘दुनिया के सभी जल स्रोत माँ गंगा से जुड़े हुए है । सभी नदियां समुद्र में मिलती है जो हमें तक दूसरे से जोडता है । जल ही जीवन है जिस प्रकार योग हमें आपस में जोड़ता है उसी प्रकार जल भी हमें जोड़ता है । जिस प्रकार योग सभी के लिए है उसी प्रकार गंगा भी । हमने शांति के लिए योग करने का संकल्प लिया है । हमें महसूस करना चाहिए की बहुत से लोग पर्यटन जल के आभाव में मौत के मुंह में समा जाते है । अतः जल की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है ।

प्रातः कालीन अन्य कक्षाओंka सुभारम्भ आनंद मेहरोत्रा द्वारा हार्ट आफ कम्पैशन, डॉ इंद्रा शर्मा द्वारा पारंपरिक हठ योग एवं सूर्यनमस्कार, कोलंबिया दक्षिण अमेरिका से पधारे स्वामी बी इ परमाधवयति द्वारा ‘इनबाउंड योग’ एवं सांडिया देसाई द्वारा ‘टाई-ची’ के अभ्यास के साथ हुआ । इसके अतिरिक्त बाली इंडोनेशिया से डॉ. आंद्रिया पेज ने स्वस्थ्य की बुनियाद पर परिचर्चारा की जबकि हवाई दिप अमेरिका से आई आनंद्रा जॉर्ज ने गंगा के तट पर संगीतमय ध्यान कराया साथ ही सूर्योदय नाद योग का भी अभ्यास करवाया ।

गोल्डन ब्रिज योग के संस्थापक गुरुमुख कौर खालसा एवं न्यूयार्क के जीवमुक्ति योग के योगाचार्य जूल्स फेबर ने विभिन्न प्रकार के आसनों का अभ्यास कराया । अष्ठांग एवं हठ योग विशेषज्ञ भारत शेट्टी ने ‘न हटात न भलथ’ अर्थात दबाव रहित अभ्यास को परिभाषित करते हुए कहा कि आसान के दौरान प्रत्येक क्षण को श्वास किर्या के साथ जोड़ो; अपने परिवेश में विद्यमान योगिक ऊर्जा का आनंद लो । अनवरत रूप से प्रवाहमान गंगा की अविरल धरा एवं हिमालय से प्राप्त सतत आनंद से स्वयं को जोड़कर उसे आत्मसात करो ।’

मुम्बई से आये योगाचार्य परमानन्द अग्रवाल एवं शिल्प जोशी ने अष्ठांग योग के मुलभुत तथ्यों एवं ध्यानमय आसनों का अभ्यास करते हुए अस्थमा एवं डायबिटीज के लिए विशेष योगासनों का अभ्यास कराया ।

आध्यात्मिक संवाद श्रृंखला में लद्दाख से आये पूज्य संत भिक्खु संगसेन जी द्वारा बुद्धिस्ट ध्यान का अभ्यास कराते हुए मन को एकाग्रचित करने के साथ चित को शांत करने की विद्या के बारे में समझाया । तत्पश्चात वृदांवन से आये कीर्तनियों ने पर्यावरण एवं नदी संरक्षण के विषय में अपनी प्रस्तुतियां पेश की । वृन्दावन से आये दाल के साथ सभी प्रतिभागियों ने मिलकर अपने-अपने देश की नदियों को प्रदुषण मुक्त रखने का महासंकल्प किया । साथ ही विशेष रूप से गंगा, यमुना, अमेजन एवं यांग्जी नदियों के संरक्षण के लिए चर्चा हुई । पूज्य स्वामी जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ पञ्च महाद्वीपों के योग साधकों ने मिलकर जल संरक्षण के लिए वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सम्पन्न की ।

भोजन के पश्चात अमेरिका के एडाम बौर द्वारा कीर्तन कार्यशाला सम्पन्न की गई । तो दूसरी ओर साध्वी आभा सरस्वती जी द्वारा योग निद्रा, योगाचार्य सत्य कालरा द्वारा आन्तिरिक योग चिकित्सा एवं सातों चक्रों के विषय में अभ्यास कराया, गुरूशब्द सिंह खालसा द्वारा कुंडलिनी ध्यान साधना तथा चांदनी मिग्लीनॉ द्वारा नादब्रह्म ध्यान साधना का अभ्यास कराया गया और कहा कि दुनिया के हर कोने से यहाँ पर लोग जीवन का उत्सव मनाने आये है । एकता एवं शांति का तत्व जान्ने आये है । हम यहाँ पर शांति और एकता की भावना के साथ एकत्रित हुए है जिसकी अनुभूति हमें यहाँ पर हो रही है ।

योगाचार्य ब्रायन सिद्धार्थ इंग्ले द्वारा सोमेटिक योग, अमेरिका से आये विश्व विख्यात योगाचार्य टौमी रोजेन द्वारा योग की उच्चस्तरीय विद्याओं का अभ्यास करवाया गया । योगाचार्य लौरा प्लंब के ‘डार्क नेस टु लाईट’ विषय पर विशेष सत्र सम्पन्न कराया ।

पूज्य स्वामी जी द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग कर रहे योगाचार्य को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया गया । पूज्य स्वामी जी ने परमार्थ परिवार के सेवकों को भी उनके अथक परिश्रम व सेवा के लिए सम्मानित किया ।

आज की पावन गंगा आरती में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी नारायण गुरुकुल विद्यापीठ के पूज्य संत माधवप्रियदास जी एवं पूज्य प्रेम बाबा जी पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ ।

आज रात्रिकालीन कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों ने योग की विभिन्न विद्याओं पर मनसोहाक नृत्य प्रस्तुत किया । छोटे-छोटे ऋषिकुमारों ने श्रीमती उपासना एवं श्रीमती शर्मा के निदेशन में भजन प्रस्तुत किया गया ।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की सफलता हेतु भारत के गृहमंत्री, भारत सर्कार श्री राजनाथ सिंह जी का शुभकामना सन्देश

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव को अपनी शुभकामना देते हुए भारत के गृहमंत्री, भारत सर्कार श्री राजनाथ सिंह जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के तत्वाधान में आयुष मंत्रालय भारत सर्कार, पर्यटन विकास परिषद्, उत्तराखंड सर्कार एवं गार्डवाल मंडल विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के बारे में जानकार हार्दिक प्रसन्नता हुई ।

यह गर्व का विषय है कि इस योग महोत्सव में विश्व विख्यात योग गुरु सम्मिलित हो रहे है । योग महोत्सव में योग की विभिन्न विद्याओं का प्रदर्शन किया जाएगा । इस भव्य महोत्सव के द्वारा जीवन में योग के महत्त्व एवं सार्थकता पर प्रकाश डाला जायेगा । योग महोत्व की सफलता हेतु में परमार्थ निकेतन एवं महोत्सव में सम्मिलित अन्य सभी संस्थाओं को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हु ।

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