महामहिम राष्ट्रपति ने दिया विश्व से आये हुए योग प्रतिभागियों को विशेष सन्देश

परमार्थ निकेतन में माननीय राज्यपाल ने किया अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का उदघाटन

परमार्थ निकेतन में हुआ अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का भव्य शुभारम्भ

तेलुगु और हिंदी फिल्मों के अभिनेता श्री रामचरण चिरंजीवी पहुंचे परमार्थ निकेतन

योग संयोग की विद्या है स्वयं का दिव्यता से संयोग – स्वामी चिदानंद सरस्वती

स्वयं को जान्ने का माध्यम है योग – राज्यपाल श्री कृष्णा कांत पाल

१ मार्च, ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन, आयुष मंत्रालय – भारत सर्कार, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड, एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 29 वें. वार्षिक विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारम्भ आज 1 मार्च 2017 को उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल श्री कृष्णा कांत पाल जी, पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, पूज्य ड्रिकुगं चेतसंगजी, पूज्य प्रेम बाबा जी, पूज्य शंकराचार्य दिव्यानानद तीर्थ जी ने दिप प्रज्जवलित कर किया । महोत्सव के उदघाटन समारोह में तेलुगु और हिंदी फिल्मों के अभिनेता श्री रामचरण चिरंजीवी व उनकी धर्मपत्नी उपासना ने भी सहभाग किया

इस विश्व विख्यात कार्यक्रम की मेजबानी परमार्थ निकेतन द्वारा सन 1999 से निरंतर की जा रही है । इस महोत्सव ने विश्व स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है तथा वर्ष प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में इसका व्यापक प्रसार हो रहा है । विश्व के विभिन्न देशों से योगाचार्य, योग जिज्ञासु, योग शिक्षक एवं विद्यार्थी है कार्यक्रम में भाग लेने हेतु परमार्थ निकेतन पधार चुके हैं । इस अंतरराष्ट्रीय योगपर्व में सम्पूर्ण विश्व के लगभग 100 देशो से 1200 प्रतिभागी ने सहभाग किया

योग की कक्षाओं प्रतिः 4 बजे से रात 9:30 बजे तक लगभग 70 से अधिक पूज्य संतों, योगाचार्यों एवं विशेषज्ञों द्वारा संचालित की जाएँगी जा विश्व के 20 से अधिक देशों से पधारे हैं ।

अस्ठांग योग, अयंगर योग, विन्यास योग, कुंडलिनी योग, जीवनमुक्ति योग, सिंटोह योग, सोमैटिक योग, हठ योग, राज योग, भक्ति योग, भारत योग, गंगा योग, लीला योग, डीप योग आदि एक सप्ताह तक प्रस्तुत किये जाने वाले 150 योगों के मुख्या प्रारूप हैं । इसके अतिरिक्त ध्यान, मुद्रा, संस्कृतवाचं, आयुर्वेद, रेकी एवं भारतीय दर्शन की भी कक्षाओं सम्पन्न होंगे । देश-विदेश से आये हुए आध्यात्मिक महापुरुषों एवं धर्मगुरुओं द्वारा धार्मिक सवांद एवं प्रश्नोत्तरी का भी विशेष आयोजन इस अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में किया जायेगा ।

आज अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की प्रथम सुबह की शुरुआत प्रातः ४ बजे कैलिफोर्निया अमेरिका से आये सुखमंदिर सिंह खालसा द्वारा कुंडलिनी योग के अभ्यास के साथ हुयी । तत्पश्चात पेंसिलवानिया अमेरिका से आयी एरिक कॉफमैन द्वारा लीला योग, डा फरजाना सिराज द्वारा योग थेरेपी का समकालीन औषधि के रूप में उपयोग एवं साध्वी अभी सरस्वती जी द्वारा पारम्परिक हठ योग का अभ्यास कराया गया । अमेरिका से आयी आनंद्रा जॉर्ज द्वारा ब्रह्मुहुर्त में ध्यान के दौरान मंत्रो का मधुर वाचन किया गया ।

अल्पाहार के पश्चात प्रातः कालीन आसान की कक्षाओं में दो घंटे तक योगगुरुओं द्वारा योग का अभ्यास कराया गया । माँ गंगा के तट पर ‘योग से संयोग’ के इस विशिष्ठ मात्र का निर्देशन कैलिफोर्निया अमेरिका की प्रसिद्ध योगी लौरा प्लंब, किया मिलर, कैलिफ़ोर्निया अमेरिका के प्रसिद्ध योगी टामी रोजेन एवं ऋषिकेश व वर्त्तमान में चीन के योगाचार्य मोहन भंडारी द्वारा किया गया ।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का उदघाटन प्रातः 11:00 बजे सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर कई आध्यात्मिक संत एवं योगाचार्य भी उपस्थित रहे । इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनका स्वागत किया और स्वागत भाषण दिया । उसके पश्चात उत्तराखण्ड सर्कार के पर्यटन एवं संस्कृत मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश बगोली जी ने दुनिया के कोने-कोने से पधारे अतिथियों के स्वागत हेतु अपने विचार व्यक्त किये ।

इस अवसर पर योगाचार्यों द्वारा भव्य योग नृत्य का प्रदर्शन किया गया तथा राजदूतों एवं योगाचार्यो को ‘ट्री आफ योग’ भेंट किया । वह पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों को पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने ‘व्यवहार में योग’ का संकल्प करवाया । उन्होंने सभी से प्रकृति संरक्षण एवं पारस्थितिकीय के अनुकूल कार्य करने का आहृवान किया ।

इस अवसर पर उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल श्री कृष्णकांत पाल ने अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में आये सभी प्रतिभागियों एवं योगाचार्यों का उत्तराखंड की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि यह पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज के आशीर्वाद से सम्पन्न हो पाया । उन्होंने महर्षि पतंजलि के आठों आयामों के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि ये जीवन के हर पहलु से जुड़े है । अभिव्यक्ति, प्रसार एवं प्राप्ति की अहम् भूमिका होती है । यह स्वयं को जान्ने का माध्यम है । प्रत्येक वर्ष योग बसंत के आगमन का स्वागत करता है । इस समय बहारों बलवती होती है, फिजा में खुशबु होती है । इस खुशनुमा मौसम में योग के प्रशिक्षु आते है । इससे स्पष्ठ है योग प्रकृति के बहुत करीब है ।

उत्तराखंड देवभूमि है जहा योग का जन्मा हुआ है । दुनिया के हर कोने से आये हुए योग जिज्ञासुओं का इस भूमि में हार्दिक स्वागत है । मेरी कामना है आप सभी योग की मशाल को पूरी दुनिया में ले जाएँ । योग जीवन का उच्चतम संयोग है ।

उत्तराखंड राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्रीमती इवा आशीष श्रीवास्तव ने धन्यवाद प्रस्ताव व्यक्त करते हुएkaha, योग और अध्यात्म की भूमि पर सभी का अभिनन्दन करते हुए कहा की योग तो एक माध्यम है विभिन्न संस्कृतियों के मिलान का । ‘

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘इस दिव्या क्षेत्र में सभी प्रतिभागियों, योगाचार्यों, अतिथियों का भाव भरा अभिनन्दन है । उन्होंने कहा आप सभी हिमालय की गॉड में बसे इस दिव्या क्षेत्र में आये है यहाँ के प्रत्येक कण में दिव्यता का समवेदश है आप उसे महसूस करें ।

अपराहृन के पश्चात के कार्यक्रमों में प्रमुख रूप से अमेरिका से आये एसं बोर द्वारा कीर्तन कार्यशाला एवं ब्रूस लिप्टन द्वारा ‘विशवास का जिव विज्ञान’ विषय पर परिचर्चा हुयी । उपासना कामिनी द्वारा तन और मन के रोगों के उपचार हेतु समग्र स्वस्थ्य परिक्षण पर संवाद सम्पन्न हुआ । स्वामी बी ए परामद्वावति ने इनबाउंड योग का तथा इण्डिया योग के संस्थापक श्री भारत शेट्टी ने तन-मन एवं श्वास किया के मद्य संयोजन का अभ्यास कराया ।

पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज के साथ अभिनेता श्री रामचरण चिरंजीवी व उनके परिवार ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की और पूज्य स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया । पूज्य स्वामी जी ने उन्हें शिवत्व का प्रतिक रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया ।

पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने सभी पूज्य संतों, योगाचार्यों एवं अतिथियों के साथ मिलकर उदघाटन समारोह के पश्चात माननीय राज्यपाल श्री कृष्णा कान्त पाल जी को शिवत्व का प्रतिक रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया ।
देर रात्रि कार्यक्रम के अन्तर्गत भक्तिमय एवं आनंदपूर्ण भजन कीर्तनियों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा ।

योग कक्षाओं की झलक

कैलिफोर्निया, अमेरिका के सुखमंदिर सिंग खालसा कुंडलिनी योग के विषय में जानकारी देते हुए कहा, ‘प्राणशक्ति का केंद्र है कुंडलिनी योग । यह शरीर की सभी नदियों का सञ्चालन कर सातों चकों को जाग्रत एवं क्रियाशीक करने में मदद करता है । इस योग के अभ्यास से मस्तिष्क तनावरहित एवं क्रियाशील बना रहता है ।’

पेंसिलवानिया, अमेरिका, की लीला योग विशेषज्ञ एरिक कॉफमैन ने लीला योग की विशेषत बताते हुए कहा, ‘लीला योग पर पारम्परिक हठ योग, राज योग एवं भक्ति योग का विशेष प्रभाव है । इसके अभ्यास से आन्तिरिक ऊर्जा जाग्रत होती है । साथ ही यह शरीर एवं मन की स्वच्छता, संतुलन एवं प्रेम की भावना को विकसित करता है । यह हमारे चारों और विद्यमान सकारात्मक ऊर्जा को एकत्रित कर आत्मबल को बढ़ाता है ।

परमार्थ निकेतन की साध्वी आभा सरस्वती जी ने पारम्परिक हठ योग के बारे में संञाते हुए कहा, ‘पारम्परिक हठ योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिससे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ सकारात्मक दिशा में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है ।

पूज्य संत दर्शन व संवाद

पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, पूज्य दृकुँज काब्गों चेतसंगजी, पूज्य प्रेम बाबा जी, पूज्य शंकराचार्य दिव्यानंद तीर्थ जी ।

विशेष अतिथि

उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल श्री कृष्णा कान्त पाल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों के अभिनेता श्री रामचरण चिरंजीवी अपने पुरे परिवार के साथ, उत्तराखंड सर्कार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश बगोली जी एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री अतुल कुमार गुप्ता ।

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